Economic Analysis of Production and Marketing of Tuberose in Dharmapuri District of Tamil Nadu
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Sardar Vallabh Bhai Patel University of Agriculture & Technology, Meerut
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भारत में रजनीगिंधा का गिरा सािंस्कृहतक और धाहमथक मित्व िै, जो त्योिारोिं, धाहमथक समारोिोिं और अनुष्ठानोिं में उपयोग हकए जाने िाले सुगिंहधत फूलोिं के हलए जाना जाता िै। धमथपुरी हजला राज्य में फूल उत्पादन में अपने मित्वपूणथ योगदान के हलए जाना जाता िै और यि रजनीगिंधा फूलोिं के क्षेत्रफल और उत्पादन (2022-23) में पिले स्र्ान पर िै। 'तहमलनाडु के धमथपुरी हजले में रजनीगिंधा के उत्पादन और हिपणन का अर्थशास्त्र' पर ितथमान अध्ययन ििथ 2022-23 में हकसानोिं की सामाहजक-आहर्थक रूप रेखा का पता लगाने, क्षेत्र की िृद्धि और अद्धस्र्रता हिश्लेिण करने के उद्देश्य से हकया गया र्ा। रजनीगिंधा का उत्पादन और उत्पादकता, लागत और ररटनथ, हिहभन्न माध्यमोिं में हिहभन्न प्रणाली, मूल्य प्रसार और हिपरणन दक्षता की पिचान करना। हजले के 10 ब्लॉकोिं में से, रजनीगिंधा के तित सबसे अहधक क्षेत्र िाले दो ब्लॉकोिं (धमथपुरी और नल्लमपल्ली ब्लॉक) का चयन हकया गया र्ा। अध्ययन में प्रार्हमक और हितीयक दोनोिं डेटा का उपयोग हकया गया। प्रार्हमक डेटा एकत्र करने के हलए कुल 100 नमूना उत्तरदाताओिं में 80 हकसान और 20 बाजार मध्यस्र्ोिं का व्यद्धिगत रूप से साक्षात्कार हलया गया। यि देखा गया हक खेत का कुल औसत आकार 3.13 िेक्टेयर र्ा और रजनीगिंधा के अन्तगथत कुल औसत क्षेत्र 0.89 िेक्टेयर र्ा। उत्तरदाताओिं के पररिार का औसत आकार प्रहत पररिार 5.50 सदस्य र्ा। लगभग 45.00 प्रहतशत उत्तरदाता 45 ििथ से अहधक आयु िगथ के र्े, 43.75 प्रहतशत के पास उच्च माध्यहमक स्तर तक की योग्यता र्ी, 67.50 प्रहतशत का मुख्य व्यिसाय कृहि र्ा, 41.25 प्रहतशत 3,00,000-4,50,000 रुपये के िाहिथक व्यय समूि के अिंतगथत आते र्े। धान, रजनीगिंधा, ज्वार, टमाटर खरीफ में उगाई जाने िाली प्रमुख फसलें र्ीिं जबहक रजनीगिंधा, प्याज, मूिंगफली और रागी की खेती रबी मौसम में और कपास, रजनीगिंधा, चारा फसलें जायद मौसम में की जाती र्ीिं। इस अिहध के दौरान रजनीगिंधा क्षेत्र और उत्पादन के िाहिथक हिकास प्रदशथन में सकारात्मक और मित्वपूणथ िृद्धि दजथ की गई। तर्ा सी•ए•जी•आर से के माध्यम से से यि पता चला हक २०११—२३ के दौरान रजनीगिंधा के अन्तगथत क्षेत्र और उत्पादन में िृद्धि हुई िै जबहक उत्पादकता में नकारात्मक िृद्धि देखी गई िै। क्षेत्र में उच्च अद्धस्र्रता पाई गई और उत्पादन अध्ययन क्षेत्र में प्रिृहत्त पररितथन में उच्च अद्धस्र्रता की दृढ़ता को दशाथता िै। सीमािंत, छोटे, मध्यम और बडे श्रेणी के हकसानोिं के हलए रजनीगिंधा की खेती की प्रहत िेक्टेयर लागत क्रमश 269812.48, 270791.65, 285502.84 और 303559.72 रुपये र्ी। रजनीगिंधा की खेती की कुल औसत लागत 282416.70 रुपये प्रहत िेक्टेयर र्ी। प्रहत िेक्टेयर कुल लागत A1, A2, B1,B2,C1,C2 एििं C3 क्रमशः 166310.52, 173276.02, 208276.02, 221742.43, 256742.43 एििं 282416.67 रूपये पायी गयी। भूहम जोत के आकार में िृद्धि के सार् प्रहत िेक्टेयर लागत A1, A2, B1, B2, C1, C2 और C3 में िृद्धि पाई गई। सीमािंत, लघु, मध्यम और बडे श्रेणी के खेतोिं के हलए रजनीगिंधा की खेती से सकल ररटनथ क्रमशः 606520.20, 609422.40, 652758.44 और 704173.85 रुपये प्रहत िेक्टेयर र्ा। सिंबिंहधत श्रेणी के खेतोिं पर प्रहत िेक्टेयर शुि ररटनथ 336707.72, 338630.75, 367255.60 और 400614.13 रुपये र्ा। लाभ-लागत अनुपात बडे हकसानोिं के हलए उच्चतम (1.32:1) और उसके बाद मध्यम हकसानोिं (1:29:1) और
सीमािंत और लघु श्रेणी के खेतोिं के हलए समान (1.25:1) देखा गया। औसत बी:सी अनुपात 1.28 र्ा। : 1 हनिेश हकए गए प्रहत शुि रुपए पर 1.28 रुपए का ररटनथ दशाथता िै। अध्ययन क्षेत्र में रजनीगिंधा के हलए दो हिपणन चैनलोिं की पिचान की गई िै। चैनल I (हनमाथता → कमीशन एजेंट → र्ोक हिक्रेता → खुदरा हिक्रेता → उपभोिा) और चैनल II (हनमाथता → कमीशन एजेंट → खुदरा हिक्रेता → उपभोिा)। मध्यस्र्ोिं की कम सिंख्या के कारण चैनल II को 42.66 प्रहतशत के न्यूनतम मूल्य प्रसार और 1.02 की उच्चतम हिपणन दक्षता के सार् कुशल पाया गया। पानी की कमी, पीक सीजन के दौरान श्रहमकोिं की अनुपलब्धता, कीट और बीमाररयोिं का िमला, इनपुट की उच्च लागत, समय पर ऋण की अनुपलब्धता, हकसानोिं के हलए अपयाथप्त प्रहशक्षण गहतहिहधयािं रजनीगिंधा के उत्पादन में हकसानोिं के सामने आने िाली प्रमुख बाधाएिं र्ीिं, जबहक उच्च कीमत में उतार-चढ़ाि र्ा। बाजार, मौसमी मािंग, उपज का हिपणन करने के हलए सिकारी सहमहतयोिं की कमी, बाजार की जानकारी की कमी, अपयाथप्त पररििन सुहिधाएिं, बाजार तक सीहमत पहुिंच रजनीगिंधा के हिपणन में पिचानी जाने िाली प्रमुख समस्याएिं र्ीिं। बाजार के मध्यस्र्ोिं ने किा हक फूलोिं की हनरिंतर आपूहतथ की कमी, िैज्ञाहनक भिंडारण सुहिधा की कमी, फूलोिं की मािंग में उतार-चढ़ाि, उच्च पररििन लागत, रखरखाि और पररििन के दौरान खराब िोने की समस्या और उपभोिाओिं की बदलती प्रार्हमकताएिं उनके सामने आने िाली प्रमुख समस्याएिं र्ीिं।